भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के प्रादुर्भाव की पौराणिक कथा

कामरूप देश में लोकहित की कामना से साक्षात् भगवान् शंकर भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के रूप में अवतीर्ण हुए थे। उनका वह स्वरुप कल्याण और सुख का आश्रय है। पूर्वकाल में एक महापराक्रमी राक्षस हुआ था, जिसका नाम भीम था। वह सदा धर्म का विध्वंस करता और समस्त प्राणियों को दुख देता था।

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग के प्रादुर्भाव की पौराणिक कथा

भगवान विष्णु के नर नारायण अवतार है जो भारतवर्ष के बद्रिकाश्रम तीर्थ में तपस्या करते थे। उन दोनों ने पार्थिव शिवलिंग बनाकर उसमे स्थित हो पूजा ग्रहण करने के लिए भगवान शिव से प्रार्थना की। शिवजी भक्तो के प्रेम के वश में होने के कारण प्रतिदिन उनके बनाये हुए शिवलिंग में पूजित होने के लिए आया करते थे। जब उन दोनों के पूजन करते करते बहुत दिन व्यतीत हो गए

श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग प्रादुर्भाव पौराणिक कथा

भारतवर्ष में उज्जैन नाम से प्रसिद्ध नगर है जो समस्त प्राणियों को मोक्ष देने वाली है। वह नगरी भगवन शिव को अत्यंत प्रिय है। उस पूरी में एक ब्राह्मण भक्त रहते थे जो हमेशा शुभ कर्मो में अनुरक्त रहते थे। वेदों के अध्ययन तथा वैदिक अनुष्ठानो में सदा तत्पर रहते थे। प्रतिदिन घर में अग्नि की स्थापना कर अग्निहोत्र आदि नित्य कर्म करते और भगवन शिव की पूजा में संलग्न रहते थे।

श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग प्रादुर्भाव पौराणिक कथा

हमारे देश में कुल 12 ज्योतिर्लिंग हैं पहला श्री सोमनाथ जिसका वर्णन पहले किया जा चूका है। दूसरा ज्योतिर्लिंग है मल्लिकार्जुन। शिवपुराण में मल्लिकार्जुन के प्रादुर्भाव के विषय में जिस कथा का उल्लेख यहाँ किया जा रहा है| आन्ध्र प्रदेश के कृष्णा ज़िले में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल पर्वत पर श्रीमल्लिकार्जुन विराजमान हैं। इसे दक्षिण का कैलाश भी कहते हैं।

श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग प्रादुर्भाव पौराणिक कथा

शिव पुराण के अनुसार ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहले सोमनाथ का नाम आता है। अतः यह सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के महत्व से सम्बंधित कथा है। सोमनाथ भगवान शिव का पूजन करने से रोगों का नाश होता हैं| जिस प्रकार शिव शंकर ने चंद्र देव को रोग मुक्त किया था उसी प्रकार भक्ति भाव से प्रार्थना करने पर भोलेनाथ उपासक के रोग दूर कर देते है।

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